Palanquin Bearers
Lightly, O lightly we bear her along, She sways like a flower in the wind of our song; She skims like a bird on the foam of a stream; She floats like a laugh from the lips of a dream. Gaily, O gaily we glide and we sing,...
Lightly, O lightly we bear her along, She sways like a flower in the wind of our song; She skims like a bird on the foam of a stream; She floats like a laugh from the lips of a dream. Gaily, O gaily we glide and we sing,...
वह तोड़ती पत्थर; देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर— वह तोड़ती पत्थर। कोई न छायादार पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार; श्याम तन, भर बँधा यौवन, नत नयन, प्रिय-कर्म-रत मन, गुरु हथौड़ा हाथ, करती बार-बार प्रहार:— सामने तरु-माल...
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा पर्बत वो सब से ऊँचा हम-साया आसमाँ का वो संतरी हमारा वो पासबाँ हम...
उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है आख़िर इस दर्द की दवा क्या है हम हैं मुश्ताक़ और वो बेज़ार या इलाही ये माजरा क्या है मैं भी मुँह में ज़बान रखता हूँ काश पूछो कि मुद्दआ क्या है
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥ जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो। खरचै न खूटै चोर न लूटै, दिन-दिन बढ़त सवायो॥ सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो। 'मीरा' के प्रभु गि...
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥ रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि॥
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय॥ पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय। ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥ धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल ह...
বন্দে মাতরম্। সুজলাং সুফলাং মলয়জশীতলাম্ শস্যশ্যামলাং মাতরম্॥ শুভ্রজ্যোৎস্না-পুলকিত-যামিনীম্ ফুল্লকুসুমিত-দ্রুমদলশোভিনীম্ সুহাসিনীং সুমধুরভাষিণীম্ সুখদাং বরদাং মাতরম্॥
জনগণমন-অধিনায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা! পঞ্জাব সিন্ধু গুজরাট মরাঠা দ্রাবিড় উৎকল বঙ্গ বিন্ধ্য হিমাচল যমুনা গঙ্গা উচ্ছলজলধিতরঙ্গ তব শুভ নামে জাগে, তব শুভ আশিস মাগে, গাহে তব জয়গাথা। জনগণমঙ্গলদায়ক জয় হে ভারতভাগ্যবিধাতা!...
যদি তোর ডাক শুনে কেউ না আসে তবে একলা চলো রে। একলা চলো, একলা চলো, একলা চলো, একলা চলো রে॥ যদি কেউ কথা না কয়, ওরে ওরে ও অভাগা, যদি সবাই থাকে মুখ ফিরায়ে সবাই করে ভয়— তবে পরান খুলে ও তুই মুখ ফুটে তোর মনের কথা একলা বলো রে॥