रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥ रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि॥