Shayari
दिल के ख़ुश रखने को
उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
कुछ लफ़्ज़ अधूरे रह गए, कुछ ख़्वाब अधूरे रह गए। तुम पूछो तो कह दूँ सब, बस हम ही पूरे रह गए। रात भर चाँद से बातें कीं, सुबह तेरा नाम लिख बैठे।