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रहीम के दोहे

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥ रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिए डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तरवारि॥

Abdul Rahim Khan-i-Khana 8 hours ago · 1 min read 3 0 0