हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले Mirza Ghalib 8 hours ago · 1 min read 2 0 0